22 अगस्त 2008
बड़ी खबरें:
मुस्कान
मुल्ला नसरुद्दीन की दास्तान –33
भीड़ के सामने ही कुम्हार अपनी बेटी के साथ एक पत्थर पर बैठा था। कुम्हार उठ खड़ा हुआ। उसकी आँखों की रही-सही आस भी बुझ गई। गुलजान ने एक आह भरी। ऐसी दर्द भरी आवाज़ में बोली, जिसे सुनकर पत्थर भी रोने लगते, ‘अब्बा, हम बर्बाद हो गए।’ लेकिन सूदखो़र जाफ़र तो पत्थर से भी कठोर था। उसके चेहरे पर क्रूरता भरी विजय झलक रही थी।
कुछ कही, कुछ सुनी
निशाना–मुक्का–कुश्ती
ओलिंपिक ही क्यों हमने महंगाई का भी अपना रिकॉर्ड तोड़ा है।
संता बंता के किस्से
संता का गधा
अपने गधे के गुम हो जाने पर भी संता आखिर उदास क्यों नहीं था?
किस्से
तेनालीराम की भटकती आत्मा
तेनालीराम की भटकती आत्मा से पुरोहितों की घिग्घी बंध गई।
जीवन में हंसी
उनकी जुबां से
बड़े लोगों की बड़ी बात
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क्या हंसी से जिंदगी हसीन हो जाती है?
ज़िंदगी के कुछ लम्हे यादगार होते है, यादो में कुछ लोग ख़ास होते है, यू तो वो दूर होते है नज़रो से, पर उनके एहसास दिल के पास होते है....
sanjay gautam kakori
Aug 21, 2008
रेत की ज़रूरत हर रेगिस्तान को होती है, चाँद की ज़रूरत आसमान को होती है, तुम भूल ना जाना मेरे दोस्त, सच्ची दोस्ती की ज़रूरत हर इंसान को होती है...
 
Aug 21, 2008
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